थमी हुई रात

कुछ होश भी थम सा गया था प्यार के आगोश में,
लकिन धड़कनो का थमना अभी बाकी था,

रात थम गयी थी आसमान के आगोश में,
लकिन सितारों का थमना अभी बाकी था,

ओस की चादर थी बिखरी हुई पेड़ों की शाख पे,
लकिन आसुओं का थमना अभी बाकी था,

बेबस था ये जहाँ मेरी दुआओं की वजह से,
लकिन उन दुआओं का अभी कबूल होना बाकी था,

मेहन्दी तो लगा ली उसने अपने हाथों में मेरे नाम की,
लकिन उस मेहन्दी में मेरे नाम को सज़ा जाना अभी बाकी था,

रिश्तों की डोर तो थामे बैठा था मैं कब से,
लकिन उस रिश्ते की डोर का बढ़ना अभी बाकी था,

कुछ रास्ते थे अंजाने से बेगाने से,
लकिन उन रास्तों में उस हुंसफर का मिल जाना अभी बाकी था,

कुछ उदासी सी थी मेरे आँखों में,
लकिन उस उदासी को पन्नो में लिखा जाना अभी बाकी था,

माना कलम की स्याही सूख गयी थी उसकी आस में,
लकिन उसके इंतेज़ार में उस ग़ज़ल का लिखा जाना अभी बाकी था,

कुछ इबादतें थी मेरी आँखों ने पढ़ी उसकी खातिर,
उन इबादतों में उसका समा जाना अभी बाकी था,

मुंतज़ीर था मैं उसकी यादों के क़ैदखाने का,
लकिन उसकी यादों का मेरे जेहन में लिखा जाना अभी बाकी था,

रूबरू था मैं अपने हालत से अपनी किस्मत से,
लकिन खुदा को मेरा उससे रूबरू करना अभी बाकी था,

कुछ रंजिशें थी दिल की दिमाग़ के फितूर से,
लकिन उस फितूर को रगो में मिलना अभी बाकी था,

एक बेज़ान दिल था पत्थर की तरह मेरे सिने में,
उस पत्थर को उसका आईना बनाना अभी बाकी था,

#इश्क़ #हसरतें

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भीगी भीगी पलकें

कुछ भीगी भीगी पलकें थी,
कुछ भीगे भीगे से हम थे,
कुछ जूस्तजू धड़कनो की दिल से थी,
कुछ हमारी भी साँसें थी कम,

कुछ अल्फ़ाज़ चुने थे इज़हार के,
कुछ लम्हे थे इंतेज़ार के,
कुछ खामोशी थी लफ़्ज़ों की होंठों से,
कुछ खामोश भी रहे हम,

कुछ रफ़्तारें तेज़ थी धड़कनो की,
कुछ धड़कनो की रवानगी भी कम थी,
कुछ होश भी कम था लहू-ए-जिगर में,
कुछ साँसों की शरीर से गिरफ़्त भी थी कम,

कुछ रास्ते चुने थे मोहब्बत के,
कुछ मुकाम चुने थे तन्हाई के,
कुछ पगडंडिया भी थी रेशम सी,
उन रास्तों पे चलने वेल भी थे बस हम,

कुछ आरज़ू भी ज़िद से मोहब्बत करने की,
कुछ जोश भी मोहब्बत को हासिल करने का,
एक वो थी नाज़-नीन जैसी मोहब्बत की बागडोर,
और एक कटी पतंग के जैसे थे हम,

कुछ अजब ही अदा थी उस हुस्न-ए-हयात की,
कुछ हम भी शौकीन थे उसके दीदार के,
कुछ वो भी परदनशीन थी मोहब्बत से,
कुछ गम-ए-शौकीन भी थे हम,
#इश्क़ #हसरतें

ponyo

सब कुछ सीख लिया – 2

मैने तुम्हारी नज़रों से प्यार करना सीख लिया,
इसी बहाने मैने खुद से इज़हार करना सीख लिया,

मुश्किलों से मुलाक़ातें होती रहीं मोहब्बत में,
मैने उन मुश्किलों में तुम्हे अपना बनाना सीख लिया,

बड़ी लंबी होती हैं रातें इंतेज़ार की मोहब्बत में,
उन रातों में मैने तुम्हे अपना हमसफ़र बनाना सिख लिया,

खामोशी ज़ुबान बन जाती है मोहब्बत में अक्सर दिलों की,
मैने उस खामोशी से अल्फ़ाज़ बनाना सीख लिया,

आँखों से इज़हार करना अदा बन जाती है मोहब्बत में,
मैने उस अदा को अपना आईना बनाना सीख लिया,

उसका ख़याल भी आए तो धड़कने तेज हो जाती हैं,
मैने इन धड़कनो को उसके नाम से खामोश करना सीख लिया,

उससे मिलने के बहाने सोचने लगता हूँ अक्सर यूँ ही,
मैने उन बहानो को अपनी तक़दीर बनाना सीख लिया,

मुंतज़ीर रहता हूँ अक्सर उसकी मुस्कान का मैं तो,
मैने उसकी मुस्कान को अपनी ज़िंदगी बनाना सीख लिया,

अक्सर बैठ जाता हूँ रास्तों में उसकी राह देखने को,
मैने उन रास्तों को अपनी मंज़िल बनाना सीख लिया,

उसका होंठों से इज़हार करना, आँखों से इनकार करना,
मैने उसकी इन सब अदाओं में खुद को महफूज़ रखना सीख लिया,

उसकी गुस्से में रूठ जाने की अदा, मेरे मना लेने का अंदाज़,
इसी कस्म्कशिश के बीच मैने उसके गम भुलाना सिख लिया,

कभी उसकी सादगी तो कभी उसकी मासूमियत से मोहब्बत हुई,
इसी सादगी और मासूमियत से मैने उसका ख़याल रखना सिख लिया,

ज़िंदगी की जूस्तजू और उलझनो के बीच मोहब्बत हो गयी,
मैने उस मोहब्बत को अपनी सुलझन बनाना सीख लिया,

#इश्क़ #हसरतें

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इंसानियत

ज़िंदगी की कश्ती में बहे जा रहे हैं,
हम भी इंसान हैं यारों बस जिए जा रहे हैं,

रोज की भागदौड़ में खुद को ढूनडते रहते हैं,
इंसान होके इंसान को ढूनडते रहते हैं,

रोज के झगड़ों रोज की मुश्किलों को सहे जा रहे हैं,
खुद की नफ़रत को दूसरों पे दिखाए जा रहे हैं,

कभी गुस्सा होते हैं खुद की ग़लतियों पे कभी दूसरों की,
लकिन माफी माँगने से कतराए जा रहे हैं,

बड़े बेसब्र हैं हम भी यारों ख्वाइशों की तलाश में,
लकिन किसी और की ख्वाइशों को सब्र से रोके जा रहे हैं,

हर तरह के इम्तिहान लिखे हैं ज़िंदगी के हर मोड पे,
लकिन इन इम्तिहानों के बीच खुद को खोए जा रहे हैं,

ज़िंदगी को तराशना चाहते हैं पत्थर के खुदा की तरह,
लकिन उस खुदा के बन्दो को नकारते चले जा रहे हैं,

उमीदों पे कायम है जहाँ अपना ख्वाबों का,
लकिन ख्वाबों की खातिर खुद को गिराए जा रहे हैं,

बड़ी तेज रफ़्तार जिंदगी है ढेरों जेदोजेहाद के बीच,
लकिन उसी रफ़्तार से खुद से दूर हुए जा रहे हैं,

फ़र्क करना बड़ा मुस्किल हो गया इंसान और शैतान का,
लकिन फिर भी अपने मुक़द्दर से जिए जा रहे हैं,

हम भी इंसान हैं यारों बस जिए जा रहे हैं……

#जिंदगी #इंसानियत

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Love at first sight :):)

I don’t know if love happens at first sight to someone else but for me it happened. She was one of the most amazing girl i have ever seen in my life. A beautiful soul with a beautiful mind is amazing and so was she. Her smile reminded me that how it feels to be happy from inside, how it feels to be in love, how it feels to be crazy in love, how it feels to fall in love with someone’s smile again and again and how this thing makes you write verses you never wrote. You become a poet like those words were waiting for you to write them for her. I think falling in love with someone is the best feeling and it becomes a blessing when that person is also in love with you. God bless me with all the love you have, god bless me with her. Amen :):) 

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तन्हा सा दिल

काश कभी तो उसने मुझको गले से लगाया होता,
एक तन्हा सा दिल कभी तो अपने करीब लाया होता,

कुछ धड़कने भी तन्हा थी इस बेजान से दिल में,
कभी उन धड़कनो को भी खुद को सुनाया होता,

कुछ मासूम से सवाल किए थे तेरी निगाहों से,
कभी तो उन आँखों से कुछ जवाब आया होता,

कुछ किस्से से थे दिल से तुम्हारी मोहब्बत के,
कभी तो उन क़िस्सों से मेरी मोहब्बत को चुराया होता,

कुछ खामोशी सी थी मेरे होंठों पे मोहब्बत में,
कभी तो अपने होंठों से इस खामोशी को मिटाया होता,

हमने तो अजब खामोशी से की है मोहब्बत तुमसे,
कभी तुमने भी तो इस खामोशी में खुद को भुलाया होता,

हमने तो तुम्हारी मुस्कान में देखा है खुद को,
कभी तुमने भी तो हुमारे गमों में खुद को पाया होता,

मेरे तो हर जर्रे जर्रे ने तुझसे मोहब्बत की है,
कभी तुमने भी मेरी मोहब्बत को अपना एक जर्रा बनाया होता|

#इश्क़ #हसरतें

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सुकून

मुद्दतें बीत गयी तुझे याद करके नही देखा,
कुछ यूँ सुकून दे गया मुझको इश्क़ खुद को बर्बाद करके नही देखा,

मैं तो उमर भर तेरी यादों का मुंतज़ीर रहा,
ना जाने कौन सी यादों में रातों को बर्बाद करके नही देखा,

बड़ी तिसनगी सी है इन आँखों में मोहब्बत की खातिर,
कुछ जादू सा था तेरी आँखों में शायद कोई ख्वाब सज़ा के नही देखा,

चन्द अरमान से पिरोए थे संजीदा से इस दिल ने तेरी खातिर,
दिल टूटा है कुछ इस कद्र की फिर कोई अरमान पिरोके नही देखा,

चन्द मुस्कानों की खातिर ज़िंदगी से चाहा है तुझे बड़े एहतरम से,
उन मुस्कानों के बाद और किसी मुस्कान से दिल लगा कर नही देखा,

बड़ी आसानी से काट जाती थी तन्हा रातें तेरे इश्क़ के गुनाह में,
तुझसे इश्क़ के बाद उस तन्हाई में और कोई गुनाह करके नही देखा,

हर रात कटी है तन्हा तेरी मोहब्बत के ख़यालों में,
कभी उन ख़यालों में मोहब्बत को तन्हा करके नही देखा,

उमर काट जाती शायद तेरी मोहब्बत के किस्से कहानियों में,
लेकिन तेरे इश्क़ में डूब के ज़िंदगी का पन्ना पलट के नही देखा,

हर खुशी हर गुम बस तुझसे जुड़ा था मेरा इश्क़ के बाद,
हसरत-ए-इश्क़ में तेरी हर खुशी हर गुम को भुला कर नही देखा,

काश फलक से टूट जाते कुछ सितारों तेरी यादों के जुगनू की तरह,
तो इत्मिनान सा हो जाता मोहब्बत ही की है कोई सौदा करके नही देखा,

कुछ तस्वीरें थी तेरी यादों की मेरे दिल के घरोंदे में,
उलफत कुछ यूँ हुई नज़र मिलने की जब देखा तो बस ज़मीन से आसमान देखा,

#इश्क़ #हसरतें

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