तन्हा सा दिल

काश कभी तो उसने मुझको गले से लगाया होता,
एक तन्हा सा दिल कभी तो अपने करीब लाया होता,

कुछ धड़कने भी तन्हा थी इस बेजान से दिल में,
कभी उन धड़कनो को भी खुद को सुनाया होता,

कुछ मासूम से सवाल किए थे तेरी निगाहों से,
कभी तो उन आँखों से कुछ जवाब आया होता,

कुछ किस्से से थे दिल से तुम्हारी मोहब्बत के,
कभी तो उन क़िस्सों से मेरी मोहब्बत को चुराया होता,

कुछ खामोशी सी थी मेरे होंठों पे मोहब्बत में,
कभी तो अपने होंठों से इस खामोशी को मिटाया होता,

हमने तो अजब खामोशी से की है मोहब्बत तुमसे,
कभी तुमने भी तो इस खामोशी में खुद को भुलाया होता,

हमने तो तुम्हारी मुस्कान में देखा है खुद को,
कभी तुमने भी तो हुमारे गमों में खुद को पाया होता,

मेरे तो हर जर्रे जर्रे ने तुझसे मोहब्बत की है,
कभी तुमने भी मेरी मोहब्बत को अपना एक जर्रा बनाया होता|

#इश्क़ #हसरतें

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