इंसानियत

ज़िंदगी की कश्ती में बहे जा रहे हैं,
हम भी इंसान हैं यारों बस जिए जा रहे हैं,

रोज की भागदौड़ में खुद को ढूनडते रहते हैं,
इंसान होके इंसान को ढूनडते रहते हैं,

रोज के झगड़ों रोज की मुश्किलों को सहे जा रहे हैं,
खुद की नफ़रत को दूसरों पे दिखाए जा रहे हैं,

कभी गुस्सा होते हैं खुद की ग़लतियों पे कभी दूसरों की,
लकिन माफी माँगने से कतराए जा रहे हैं,

बड़े बेसब्र हैं हम भी यारों ख्वाइशों की तलाश में,
लकिन किसी और की ख्वाइशों को सब्र से रोके जा रहे हैं,

हर तरह के इम्तिहान लिखे हैं ज़िंदगी के हर मोड पे,
लकिन इन इम्तिहानों के बीच खुद को खोए जा रहे हैं,

ज़िंदगी को तराशना चाहते हैं पत्थर के खुदा की तरह,
लकिन उस खुदा के बन्दो को नकारते चले जा रहे हैं,

उमीदों पे कायम है जहाँ अपना ख्वाबों का,
लकिन ख्वाबों की खातिर खुद को गिराए जा रहे हैं,

बड़ी तेज रफ़्तार जिंदगी है ढेरों जेदोजेहाद के बीच,
लकिन उसी रफ़्तार से खुद से दूर हुए जा रहे हैं,

फ़र्क करना बड़ा मुस्किल हो गया इंसान और शैतान का,
लकिन फिर भी अपने मुक़द्दर से जिए जा रहे हैं,

हम भी इंसान हैं यारों बस जिए जा रहे हैं……

#जिंदगी #इंसानियत

Game-of-Thrones-Ramsay-Snow-Quotes-Wallpaper

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