आईना

रात की चादर तले, नीले आसमान के आगोश में, कुछ जुगनू चमचमा रहे थे| कुछ सितारे आपस में गुफ्तगू कर रहे थे जैसे एक दूसरे को खुद की तन्हाई के किस्से सुना रहे हो| चाँद भी शबनम की तरह पूरे शबाब पे था, मानो किसी के इंतेज़ार में मोहब्बत कर बैठा हो| हल्की हल्की ओस की बूँदें पत्तों पे यूँ गिर रही थी जैसे किसी की आँखों से मोती बिखर रहें हो| आज हम लोग फिर से मिलने वाले थे| मैं उसके इंतेज़ार में यूँ ही खुद से बातें कर रहा था की मैने ध्यान भी नही दिया वो कब मेरे पीछे आके खड़ी हो गयी| उसने मेरा नाम लिया और कहा, क्या बात है कहाँ खोए हुए हो| मैं बस एकटक उसको देख रहा था| उस नीले आसमान के नीचे वो आसमानी कुर्ती में कायनात जैसी नज़र आ रही थी| शायद हुमारी दोस्ती में मुझे उसके लिए प्यार नज़र आने लगा था| मैं इतना खो चुका था अपने ख़यालों में की मैं भूल गया की वो मेरे करीब है| अचानक से फिर उसकी आवाज़ ने मुझे ख्वाबों से जगाया| वो कहने लगी, कहाँ खो जाते हो बार बार| मैने कहा कुछ नही, बस यूँ ही कुछ सोचने लगा था| उसने कहा, कहो क्या बात करनी है, तुम्हे पता है ना पापा घर पे है आज| बड़ी मुश्किल से आई हूँ तुमसे मिलने, ज़्यादा वक़्त नही है मेरे पास| मैं थोड़ा गुस्सा हो गया और कहा, तुम हुमेशा ही जल्दी में रहती हो| मेरे लिए समय तो तुम्हारे पास है ही नही| वो मेरे करीब आई और मेरा हाथ पकड़ा और कहने लगी, तुम बहुत जल्दी गुस्सा हो जाते हो| तुम्हारे लिए ही आई हूँ पापा से झूठ बोलके लकिन तुम हो की कुछ समझते ही नही| मेरा गुस्सा कुछ शांत हुआ उसकी बातें सुनके और मैने कहा माफ़ करना, ना जाने तुमसे ना मिलने पे मुझे गुस्सा क्यूँ आ जाता है| मेरे दिल तो कह रहा था की आज बोल दे की तू प्यार करता है उससे| बता दे की तू रातों में जाग जाग के बस उसके बारे में सोचता है| तुझे उसकी हर हरकत क्यूँ इतनी पसंद है| क्यूँ तू उसके वाय्स नोट्स बार बार सुनता है| क्यूँ तू हर बार उसकी पसंद का गाना सुनता है| मैने भी आज उसे यही सोचके बुलाया था की उससे कह दूँगा की मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ| मैने एक बार उसकी आँखों में देखा और एक बार फिर अपने दिल की धड़कने सुनी| क्या मैं सही कर रहा हूँ? अगर वो मुझे नही चाहती तो क्या करूँगा? मैं उससे हमेशा के लिए खो दूँगा लकिन मैं नही चाहता ऐसा हो| यही सब सोचके मैने उससे कुछ नही कहा| वो पूछने लगी, बताओ ना क्यूँ बुलाया मुझे यहाँ? मैने कहा कुछ नही, बस तुम्हे देखने का दिल था| तुम्हे देख के मुझे बहुत सुकून सा मिलता है| मेरी बात सुनके वो शर्म से मुस्कुराई और कहने लगी बड़े पागल हो तुम| मुझे देखने के लिए इतनी दूर बुलाया मुझे| अपनी तस्वीर भेज देती मैं देखते रहते| मैने कहा तस्वीरें बातें नही करती और ना ही उन्हे तुम मुस्कुराते देख सकते हो| ये सुनके उसने कहा, बहुत प्यार करते हो ना मुझे और मुझे गले से लगे लिया| मैने कहा तुमने बहुत देर लगा दी समझने में|

#आईना #इश्क़ #हसरतें

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