मदहोशी

मदहोशी सी है उसकी आँखों में,
नशा मोहब्बत का रहता है,

देख लेता हूँ तो झूमता रहता हूँ,
जैसे बरसों से कुछ पी रखा है,

बातें उसकी लगती है मधुशाला जैसी
पल पल में मन मचलता रहता है,

चेहरा है जैसे ये फूल कमल का
जब देखूं तो हँसी का महल खिला रहता है,

होंठ हैं ये प्याले मधुशाला के
चुन लूँ इनको तो इश्क़ महकता रहता है,

कानो में है झुमके उसके, ऐसा लगे की,
जैसे तारों को किसी ने अपने सज़ा रखा है,

बातें करते करते जब मुस्कुरा दे,
तो लगता है भ्रम जाल किसी ने बुन रखा है,

आँखें है गहराई सी उजलाई सी काजल के रंग में,
ऐसा लगता है मानो इंद्रधनुष सा सज़ा रखा है,

लड़की है या पारी के जैसी,
मोहब्बत में मुझे डूबा रखा है,

#इश्क़ #हसरतें

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